Skip to main content

Posts

Showing posts from September, 2016

Shayri..

ये हवाए,ये नदिया, ये समंदर सब कुछ तु है अनाथो के झोली की वो रोटी तु है हमारे माता की ममता तु है इस परिंदे दिल की हर ख्वाईश तु है.. चाहु तो इन सारे बुंदो को इकठ्ठा करके समंदर बनाके ...

क्षितिज...-Marathi poem

कुठेतरी हाताला टेकणारं मला क्षितिज दिसावं आणि मी धडपडुन ते पकडण्यासाठी  धावत जावं ह्रदयात माझ्या हर्ष भरुन यावा परंतु  क्षितिजापरी पोचता ह्या अपंगाचा कंठ दाटून यावा....

Shayri

खुदा के परिंदो का ना ढुंढ तु मंदिर या मस्जिद पे वो अक्सर घुम रहे है इन्सानो की कफन मे कहते है, "इन्सान तो अब हो गया है अन्धा उसने खुदा को भी खरीद लिया था उस भरे बाजार मे... - Nayan

कहानी..-hindi poem

कहानी.. कुछ कहानिया अलग सी होती है... जजबातो मे फसी हुई.. जिंदगी की हर मोड पे एक नया कदम लेने वाली... रास्ते मे कितनी भी बडी लहर आ जाये ये रुकती नही,बस चलती रहती है.. हर कदम एक नया ऎहसास है इस अलग से कहानी मे.. इश्क का वो हर जजबा है उसके पुरे रुह मे.. एक नयी पहचान है उसके हर पंक्तियो मे.. ये कहानी हर किसी की नही होती उसका पुरा होना तो सिर्फ इत्तेफाक की बात है.. इस अजीब से मैखाने मे कभी हार भी जाते है ये पल पर उनका मुस्कुराना ये जिंदगी का साथ है.. चाहकर भी अधुरी सी रह जाती है ये कहानी... उस उलझते हुऎ मंजिल की तरह.. हम सब तो एक जरिया है उस कहानी को खत्म करनेवाला लेकिन कभी कबार अपने रास्ते खुद ढुंढ लेती है ये कहानी.. उस बहने वाले पानी की तरह.....                 -नयन मोहितकर..

Hindi shayri...

मुसाफिर.....   ये रास्ते है या मंजिले पहचान नही पाता तुमसे मिलना इत्तेफाक है या हकिकत कुछ समझ नही आता.... कभी कभी तुम मुझसे इतना दुर चली जाती हो ये सजा मानू या करम खुदा का.. क्युकी ये मुसाफिर दिल किसी ना किसी मोड पे तुमसे मिले बिना संभल नही पाता....                                   -नयन..

Hindi shayri

इश्क .... दिल की जजबाते लेकर आये थे हम.... पर कहने से शायद डर गये. कहना था कुछ मोहब्बत के इजहार मे.. लेकिन तुम्हारी नजरो से बिखर गये.. ये दिल चाहता है तुम मुझसे मिलो तो कुछ इश्क की बात होगी.. लेकिन खुदगर्ज हो तुम और खुदर्गज हु मै इश्क के इस मैखाने मे फिर से वही पुरानी बात होगी....                       -नयन..

Hindi shayri

खुदा .... खुदा के परिंदो का ना ढुंढ तु मंदिर या मस्जिद पे वो अक्सर घुम रहे है इन्सानो की कफन मे कहते है, "इन्सान तो अब हो गया है अन्धा उसने खुदा को भी खरीद लिया था उस भरे बाजार मे...                         -नयन

marathi kavita-guru...

 गुरु .... पावसाच्या त्या अनेक थेंबामधे तु या लहान थेंबाला टिपत होतास त्या थेंबाचा समुद्र घडवण्यासाठी तु मात्र रोज झटत होतास वाहणार्या हवेची तु नेहमी दिशा बदलत राहिला.. फुलणार्या या बेरंग फुलामधे तु स्वतःचा सुगंध वाहिला.. पाण्यामधल्या चिखलामध्ये सुद्धा तु कमळ फुलवावा कोवळ्या या मनाच्या मातीमधुन तु विज्ञानाची मडके घडवणारा कुंभार शोधावा.. जगातली सगळी स्वप्ने पुर्ण करण्यासाठी.. तु या रोपट्याला पाणी देत राहिला.. आणि माणसाच्या या रुपात मी त्या गुरुत देव पाहिला..                          -नयन राजेंद्र  मोहितकर..