ये हवाए,ये नदिया, ये समंदर सब कुछ तु है
अनाथो के झोली की वो रोटी तु है
हमारे माता की ममता तु है
इस परिंदे दिल की हर ख्वाईश तु है..
चाहु तो इन सारे बुंदो को इकठ्ठा करके
समंदर बनाके रखु ए खुदा
लेकिन क्या करे
वो गरिब के दिल से निकली हुई
हर इबादत का दस्तुर तु है....
-नयन...
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