मुसाफिर.....
ये रास्ते है या मंजिले पहचान नही पाता
तुमसे मिलना इत्तेफाक है या हकिकत कुछ समझ नही आता....
कभी कभी तुम मुझसे इतना दुर चली जाती हो
ये सजा मानू या करम खुदा का..
क्युकी ये मुसाफिर दिल किसी ना किसी मोड पे
तुमसे मिले बिना संभल नही पाता....
-नयन..
ये रास्ते है या मंजिले पहचान नही पाता
तुमसे मिलना इत्तेफाक है या हकिकत कुछ समझ नही आता....
कभी कभी तुम मुझसे इतना दुर चली जाती हो
ये सजा मानू या करम खुदा का..
क्युकी ये मुसाफिर दिल किसी ना किसी मोड पे
तुमसे मिले बिना संभल नही पाता....
-नयन..
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