*दिवाना.....*
वो चुपके से कुछ कहती थी,
और मै गौर से सुनता था......
ये अनजान हमारे रिश्ते से
पागल पुरा जमाना था..
वो धिरे से चुराती थी बाते मेरे दिल की
मै उसे चुराते ,देखता रहता था...
वो चुपके से मेरे दिल को छुती थी
और मै पागलो कि तरह मुस्कुराता था..
वो हरदम मेरे ख्वाबो खयालो मे टहलती रहती थी
और मै उसके मुस्कुराने की राह देखता था...
वो अजाबी इस दुनिया मे, दिल
मे अरमान जगाती थी....
और मै उस मुकद्दस चेहरे
के लिबासो मे झुंझता रहता था..
वो हर वक्त मुस्कुराया करती थी
शायद कुछ खास था उसकी मुस्कुराहट मे
कुछ अपना सा..दिल को छु जाने वाला
क्युकी उस मुस्कुराहट का
कोई आज भी दिवाना है ...
और कल भी दिवाना था....
- नयन मोहितकर.....
Comments
Post a Comment