*ये दिल के कुछ कोरे पन्ने.....*
ये दिल के कुछ पन्ने है
जो चाहकर भी मै लिख नही पाता.....
कभी लगता है
वो कोरे पन्ने भी कुछ
कहने लगते है...
हाल इस दिल का
उनको बताते रहते है....
लेकिन वो बाते है कुछ
उलझी हुई सी...
जो इस दिल को हर वक्त
समझ मे नही अाती...
शायद मुझे ढुंढना चाहिए
जवाब इन बातो का...
लगता है वो बात
मेरे दिल के दायरे मेै है कुछ बेरुखि सी...
लेकिन अक्सर मै उसे ढुंढ नही पाता...
जमाना उठाता है सवाल मुझपे
क्यो मै रहता हु ऐसा
झुंजला हुआ सा....
अपने ही खयालो मे
बहका हुआ सा....
अक्सर उन्हे पता नही
जो बात मै ढुंढ नही पाता
समझ नही पाता....
शायद वो इस दिल के कोरे पन्नो
मे मिल जाऎ......
- नयन मोहितकर.....
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