जिंदगी.....
जिंदगी कुछ उस बारिश की तरह है
जो हर दम बरसती नही...
जो हर दम बरसती नही...
उसकी हर एक बुंद मे
एक नजरिया है कुछ पाने का
हर वो जिंदगी का
नामुमकिन सपना जिने का..
एक नजरिया है कुछ पाने का
हर वो जिंदगी का
नामुमकिन सपना जिने का..
पर अक्सर हमारी ख्वाईशे
कुछ अधुरी सी रह जाती है..
उस गिरते हुए बुंद की तरह...
कुछ अधुरी सी रह जाती है..
उस गिरते हुए बुंद की तरह...
कुछ अलग से जजबात होते है
हर बरसने वाले बारिश मे.
जैसे की हर दिल उलझता है
जिंदगी के बिछे हुए साजिश मे
कभी कभी नही मिल पाती
वो हर मंजिल जिसे हम चाहते है
शायद चाह उसी की होती है
जो मुक्कदर मे लिखा ही नही
हर बरसने वाले बारिश मे.
जैसे की हर दिल उलझता है
जिंदगी के बिछे हुए साजिश मे
कभी कभी नही मिल पाती
वो हर मंजिल जिसे हम चाहते है
शायद चाह उसी की होती है
जो मुक्कदर मे लिखा ही नही
दिल मे बस एक अरमान चाहिये
उसे बरसते हुए देखने का..
अपने मंजिलो को खुद की
लहरो मे चपट लेने का...
बस बुंद बुंद इकठ्ठा कर के
उसका समंदर बनाये रखना...
क्युकी जिंदगी उस बारिश कि तरह है
जो हर दम बरसती नही...
जो हरदम बरसती नही...
उसे बरसते हुए देखने का..
अपने मंजिलो को खुद की
लहरो मे चपट लेने का...
बस बुंद बुंद इकठ्ठा कर के
उसका समंदर बनाये रखना...
क्युकी जिंदगी उस बारिश कि तरह है
जो हर दम बरसती नही...
जो हरदम बरसती नही...
-नयन मोहितकर
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