ऐ इश्क, इस पागल दिल को आकर कोइ सलाह दे
हारलेल्या या ह्रदयाला थोडासा तरी आभास दे..
इश्क की हर लब्ज पे मैने नाम था तेरा लिखा
चार दिन के उन लम्हो मे ढाई अक्षर था लिखा
बेगुनाह इश्क को अब तो, थोडी सी सजा ही दे
गंध दे मला फुलांचा,या एकदा विश्वास दे
ऐ इश्क, इस पागल दिल को आकर कोइ सलाह दे
हारलेल्या या ह्रदयाला थोडासा तरी आभास दे..
ख्वाइशो से हर तेरी,दिल का टुकडा था ये बना
गर्दिशोे के उन गुनाह मे भी ,ईश्क मैने तुझपे किया
अब तो मेरे आसुऒ को ,प्यारी सी दुआ ही दे
हरवलेल्या या मनाला फक्त एकदा आवाज दे
ऐ इश्क, इस पागल दिल को आकर कोइ सलाह दे
हारलेल्या या ह्रदयाला थोडासा तरी आभास दे....
दिल की अब हर नोक पे, दर्द था मैने भरा
आखरी पलो मे भी, प्यार सिर्फ तुझसे किया
अब तो अकेले इस दिल को आखरी पनाह दे
वेदनांना या माझ्या देवा,फक्त तुझा साज दे.
ऐ इश्क, इस पागल दिल को आकर कोइ सलाह दे
हारलेल्या या ह्रदयाला थोडासा तरी आभास दे..
-नयन मोहितकर
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