कोइ मुल्क किसी से पराया नही होता.
हर किस्म कि शरीर मे जगा इन्सान नही होता.
कभी इन्सानियत कि बाते करने वाले भी बदल चुके हुए. है अब.
क्युकी यहा हर हरी पत्ती के आगे जमाना नही होता.
इन्सान इन्सान मे भेद करने वालो
जात पात पे राजकारण करने वालो
किसी ना किसे के आसुऒ के लिये आप जबाबदार हो जरुर
लेकिन. सुन लो जरा गौर से
यहा सच्चाई और मोहब्बत के आगे कोइ अफसाना नही होता........
कोइ अफसाना नही होता...
. -नयन मोहितकर
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