तुझे रोक कर भी
रोक न पाया हु मै
इस जिंदगी का हाल जिंदगी
को ही पुछता आया हु मै
वक्त का इतना बडा दौर छुपाने के लिये
जिंदगी का हर पल जिता आया हु मै
तेरे मोहब्बत के खातिर
इस दिल कि हर ख्वाइशो को पुरा करते आया हु मै
तेरी हर मुस्कुहारट को भुलाने के
लिये आसुओ कि सौगात लाया हु मै
न जाने तेरे प्यार के खातिर
उस खुदा से भी पैगाम ढूंढ लाया हु मै..
मेरी तेरे साथ गुजारे हर हसिन पल
कि झोली भर लाया हु मै
तु मेरे कितने भी दुर क्यु न हो
उस झोली से हि एक एक पल निकालते
जिते चले आया हु मै.
जिते चला आया हु मै.....
-नयन मोहितकर
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